July 8, 2010

स्वर्ग में नरक

     फिर से घाटी में बवाल मचा हुआ है। अलगाववादी अपने मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं। कश्मीर कि अवाम को भड़काया जा रहा है। जिसके चलते निर्दोष नागरिकों कि बेवजह मौतें हो रही हैं। जितनी बार किसी निर्दोष कि मौत हो रही है उतनी बार बवाल बढता जा रहा है। बवाल इतना बढ गया है कि शांति कि कोशिश बिफल होती जा रही है। आज हालात ये बन गए हैं कि घाटी को सेना के हवाले कर दिया गया। पर क्या कश्मीर को सेना के हवाले कर देने से मसला हल हो जायेगा। घाटी के अमन-चैन बहाल हो जायेंगे? देखते ही लोगों को गोली मारने का आदेश दे दिया गया है। मीडिया के कैमरे जब्त कर लिए गए हैं। इसका तो यही मतलब है अगर जिन्दगी से प्यार है तो शांत हो कर अपने घरों में रहो या फिर जान प्यारी नहीं है तो पेट कि आग बुझाने के लिए ना चाहते हुए भी बाहर प्रदर्शन का समर्थन करने निकलो और अपनी जान से हाथ धो बैठो। सरकार का कश्मीर को सेना के हवाले करने से शायद वहाँ अमन बहाली हो जाये पर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर के प्रति भारत कि दलीलों का क्या होगा? अमन कि बहाली के लिए अपने ही लोगों को सेना के हवाले किया जा रहा है जो निश्चित तौर पर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत कि छवि को धूमिल करेगा

12 comments:

  1. blogjagat mein aapka swagat hai.....likhiye...khoob likhiye

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  2. इतना गंभीर लेखन के बाद अलगाव का समर्थन? अंर्तराष्ट्रीय समुदाय तो हमेशा ही भारत के खिलाफ रहा है। आतंकवादियों का कोई भी मानवाधिकार नही होता, मानव जीवन के हत्यारों का कोई अधिकार नही है।

    अखिलेश,फरीदाबाद से

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  3. ब्लागिंग की दुनिया में आपका स्वागत है। आपका ब्लाग सुंदर है, यदि अलगाववादियों की बोली न बोलें तो शायद विचार भी सुंदर हो जाएंगे।
    यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि बेगुनाह देशवासियों का खून बहाने पर उतारू अलगाववादियों और नक्सलियों को देश के बाहर से ही नहीं देश के अंदर भी आप जैसे लोग जानबूझ कर या अनजाने में समर्थन दे रहे हैं।
    ..
    इंटरनेट के जरिए अतिरिक्त आमदनी के लिए यहां पधारें - http://gharkibaaten.blogspot.com

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  4. बवाल तो मचेगा ही .स्वर्ग हो या नरक मानव को मरने के बाद ही मिलता है .

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  5. mere hisab se yah lekh algavvadiyon ka samarthan nahin karta hai, balki bharat ki vifal kashmir niti ka kachcha chiththh samne laya hai...abhi tak bhart kyo nahi ghati ki aag ko shant nahin kar saka, yah sochne ka mudda hai, na ki kattar hinduvadee ki tarah hame hamaree galat nitiyon ka gungaan karna chahiye...yah baat jab tak ham nahin samjhenge ki bagair aawam ko sath liye kashmir ko nahin suljha sakte, ha yah zarur hai ki kuchh algawvadee takte waha apni roti senk rahe hain, lekin uske liye aag hamari galat nitiyan sabit ho rahi hai.

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  6. सुरक्षा देने का यह एक तरीका है कि जिसे सुरक्षित करना हो
    उसे ही ताले में रखो........................... जैसे साहूकार अपने धन को तिजोरी में रखता है.
    उसे बाँध कर रखो............................. जैसे इज्जतदार अपनी इज्जत पगड़ी से बांधकर रखता है.
    उसे छिपा कर रखो............................. जैसे सौंदर्य को कुछ बुर्के में और कुछ घूँघट में छिपाकर रखते हैं.
    उसे दबा कर रखो............................... जैसे शांती के समर्थक अपने व्यक्तिगत विरोध को दबाकर रखते हैं.

    वैसे ही इस आतंक से सुरक्षा पाने का तरीका है कुछों को ताले में रखना [गद्दारों को],
    कुछों को बाँधकर रखना [जीवन में कुछ संकल्प-सूत्रों को],
    कुछों को छिपाकर रखना [दुश्मनों से सरकारी दस्तावेजों को],
    कुछों को दबाकर रखना [गद्दारों के अबोध समर्थकों को]

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  7. इतनी संजीदगी से सही बात को उठाया गया है, फिर भी लेखक पर अलगाववादियों के समर्थन का आरोप लगाना बेहूदा और पूर्वाग्रही तर्क है। हाँ उक्त आलेख अधूरा सा अवश्य प्रतीत होता है। केवल भारत की विदेशों में क्या छवि कैसी रहेगी, इसी बात की चिन्ता नहीं करनी है, बल्कि हमें हमारी निकम्मी और वादाखिलाफी करने वाली केन्द्रीय सरकारों की भी कडे से कडे शब्दों में आलोचना करनी चाहिये, जिनकी वजह से कश्मीर समस्या इतने दशकों तक जिन्दा है।

    पाकिस्तान का रुख भी समस्या के लिये जिम्मेदार है, लेकिन दुश्मन को कूटनीतिक रूप से या अन्य किसी भी तरह से राजी नहीं कर पाना भी तो हमारी सरकार कर ही विफलता है। हमारी विदेश नीति हमेशा से अफसरशाही के भरोसे रही है, जो अफसरों को ठीक लगा किया जाता रहा। नेहरू को अनेक लोग दोषी ठहराते हैं। अनेक श्रीमती इन्दिरा गाँधी द्वारा किये गये शिमला समझौते को भी अनुचित मानते हैं। सच्चाई जो भी हो लेकिन भारत सरकार एवं अफसरशाही इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते कि उनकी असफलता के कारण ही कश्मीर समस्या जिन्दा है, ऐसे में इनकी असफलता की कीमत निर्दोष लोगों को चुकानी पडे, यह तो लोकतन्त्र की नीति का हिस्सा नहीं है?

    बात चाहे, अलगाववादियों की हो या नक्सलवादियों की अधिकतर मामलों में दोषी छूट जाते हैं और निर्दोष लोगों को सेना या पुलिस के कहर झेलने पडते हैं। श्री सत्यप्रकाश पाण्डेय जी द्वारा उठाये गये संवदेनशील मुद्दे के लिये बधाई एवं साधुवाद।

    शुभकामनाओं सहित। धन्यवाद। आपका-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश, सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) (जो दिल्ली से देश के सत्रह राज्यों में संचालित है। इस संगठन ने आज तक किसी गैर-सदस्य, सरकार या अन्य किसी से एक पैसा भी अनुदान ग्रहण नहीं किया है। इसमें वर्तमान में ४३५६ आजीवन रजिस्टर्ड कार्यकर्ता सेवारत हैं।)। फोन : ०१४१-२२२२२२५ (सायं : ७ से ८) मो. ०९८२८५-०२६६६
    ........................
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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  8. तलाश जिन्दा लोगों की ! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!
    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

    सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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  9. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  10. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
    गार्गी
    www.feelings44ever.blogspot.com

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  11. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
    जनोक्ति.कॉम www.janokti.com एक ऐसा हिंदी वेब पोर्टल है जो राज और समाज से जुडे विषयों पर जनपक्ष को पाठकों के सामने लाता है . हमारा प्रयास रोजाना 400 नये लोगों तक पहुँच रहा है . रोजाना नये-पुराने पाठकों की संख्या डेढ़ से दो हजार के बीच रहती है . 10 हजार के आस-पास पन्ने पढ़े जाते हैं . आप भी अपने कलम को अपना हथियार बनाइए और शामिल हो जाइए जनोक्ति परिवार में !
    एसएम्एस देखकर पैसा कमा सकते हैं http://mGinger.com/index.jsp?inviteId=janokti

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तेजी से भागते हुए कालचक्र में से आपके कुछ अनमोल पल चुराने के लिए क्षमा चाहता हूँ,
आपके इसी अनमोल पल को संजोकर मैं अपने विचारों और ब्लॉग में निखरता लाऊंगा।
आप सभी स्नेही स्वजन को अकेला कलम की तरफ से हार्दिक धन्यवाद !!

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